वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दरवाजे ?|SRBS DESIGN's|
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दरवाजे कहाँ,कितने और किस लकड़ी से बने होना चाहिए?
"नमस्कार मित्रों"
1. वास्तु शास्त्र अनुसार मुख्य द्वार उत्तर एवं पूर्व मुखी सर्वश्रेष्ठ होता हैं,क्योंकि ब्रम्ह मुहूर्त में सूर्यदेव की दिशा उत्तर एवं जब सूर्यदेव जी का उदय होता हैं। तो आने वाली किरणें एक सकारात्मक ऊर्जा को उतपन्न करती हैं एवं हानिकारक वायरस का नाश करती हैं।
2. इसके बाद यदि आपका घर पश्चिम मुखी हैं,तो प्रयास करें कि मुख्य द्वार वायव्य कोण में हो क्यों कि सूर्यदेव पश्चिम दिशा में अस्त होने के बाद वायव्य कोण की ओर प्रस्थान करते हैं। जिससे घर की उन्नति कहे या सकारात्मक ऊर्जा कहे वह सुचारू रूप से उपस्थित रहती हैं।
3. अब यदि घर दक्षिण मुखी हैं,तो मुख्य द्वार आग्नेय कोण एवं दक्षिण के मध्य में बनायें चूंकि वास्तु शास्त्र अनुसार इस दिशा में मुख्य द्वार अच्छा तो नहीं माना जाता परंतु यदि आपका मुख्य द्वार इसी दिशा में आ रहा हैं,तो आप ऊपर दिये गये दिशा का अनुसरण कर सकते हैं। और किसी प्रबुद्ध वास्तु शास्त्री से परामश ले सकते हैं।
अब हम जानेंगे कि दरवाजो या फर्नीचर हेतु किन लकड़ियों का उपयोग करना शुभ एवं फायदेमंद होता हैं:-
दरवाजों,खिड़कीएवंफर्नीचरहेतु आप शाल,सागौन,अशोक,आम,रोहिणी,कायफल,शीशम,अर्जुन,चंदन आदि जैसे वृक्षों की लकड़ी का उपयोग कर सकते हैं।
नोटः- कभी भी शमशान,देव घर जैसी जगह के वृक्षों की लकड़ी का प्रयोग ना करें।
कुछ महत्वपूर्ण टिप्सः-
1.दरवाज़े,खिड़कियाँ दो पल्लों वाली बनवायें।
2.दरवाज़ो में चौखट एवं देहली अवश्य हो।
3.दरवाज़ो की संख्या 2,4,6,8,10 इस क्रम में हो।
4.लगातार तीन दरवाज़े या अधिक एक कतार में ना हो ।
आपसे अनुरोध हैं कि हमारे लेखों को अवश्य पढ़े और सभी मित्रों से शेयर अवश्य करें ताकि उन्हें भी यह जानकारी प्राप्त हो सकें।
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